धर्म आस्था

इन विभिन्न भावों में होता है सूर्यदेव का अलग प्रभाव

ज्योतिष में सूर्य को राजा की पदवी प्रदान की गयी है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य आत्मा एवं पिता का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य द्वारा ही सभी ग्रहों को प्रकाश प्राप्त होता है और ग्रहों की इनसे दूरी या नजदीकी उन्हें अस्त भी कर देती है। सूर्यदेव सृष्टि को चलाने वाले प्रत्यक्ष देवता का रूप है। सूर्य पर किसी भी कुंडली में एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने पर उस कुंडली में पितृ दोष का निर्माण हो जाता है। ज्योतिष में नवग्रहों का विशेष महत्व है। विभिन्न गणनाओं और ज्येातिष के सटिक अनुमान ग्रह, गोचर की गणनाओं पर ही आधारित होते हैं। इतना ही नहीं इन ग्रहों में सूर्य को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य का बहुत महत्व है। यह पराक्रम भाव का ग्रह है। इतना ही नहीं सूर्य की आराधना से तेज,पराक्रम, यश, कीर्ति,समृध्दि, बल,धन, धान्य आदि सभी सुखों की प्राप्ति होती है। कुंडली में सूर्य के अलग-अलग भावों में स्थित होने का अलग अलग फल होता है। इतना ही नहीं यदि सूर्य प्रथम भाव में होतो यह उच्च का फल देता है।

मगर सप्तम भाव में यह नीच फल देता है। इतना ही नहीं सूर्य का दसवें भाव में होना शासकीय क्षेत्र से लाभ दिलवाने वाला होता है। अष्टम भाव में हो तो यह सरकार या शासन के लिए लाभकारी होता है। सूर्य का नवे भाव में होना विरोध का सूचक होता है। मगर दशम भाव में यह राजसी सुख प्रदान करता है। यदि यह प्रथम भाव में चंद्रमा के साथ हो तो यह माता पिता का साथ दिलवाता है।

यदि सप्तम भाव में होता है तो जीवन साथी से द्दंव करवाने वाला होता है। मगर अष्टम भाव में राज्य से प्राप्त होने वाली आय को जनता में वितरण करने वाला होता है। पंचम भाव में सूर्य के होने पर मनोंजन के विभाग और इसमें लाभ मिलता है। इस तरह से विभिन्न भागों में सूर्य विभिन्न तरह के फल देता है। सूर्य से मिलने वाले निम्न प्रभावों के लिए सूर्य को प्रसन्न कर उसकी दशा सुधारी जा सकती है।

दरअसल इसके लिए भगवान सूर्यदेव को अध्य देना, आदित्य ह्दय स्तोत्र का पाठ पढ़ना आदि शुभ होता है। रविवार के दिन यदि लाल तत्व या वस्तु का दान किया जाए। लाल कपड़े का दान गरीब को किया जाए तो भी लाभ होता है। इतना ही नहीं प्रसाद में लाल भोज्य पदार्थ या लाल पदार्थ का हलवा बनाकर वह  स्वयं सेवन किया जाए और उवसका दान दिया जाए तो भी शुभ होता है।

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