लाइफस्टाइल

लहसुन

लहसुन की कलियों को पीसकर ,सरसों के तेल में ,उबाला जाए और घावों पर लेप किया जाए, घाव तुरंत ठीक होना शुरू हो जाते है।
घुटनों के छिल जाने, हल्के फ़ुल्की चोट या रक्त प्रवाह होने पर लहसुन की कच्ची कलियों को पीसकर घाव पर लेप करें, घाव पकेंगे नहीं और इन पर किसी तरह का इंफ़ेक्शन भी नही होगा। लहसुन के एण्टीबैक्टिरियल गुणों को आधुनिक विज्ञान भी मानता है, लहसुन का सेवन बैक्टिरिया जनित रोगों, दस्त, घावों, सर्दी-खाँसी और बुखार आदि में बहुत फायदा करता है।

लहसुन सिर्फ मसाला नहीं है, आयुर्वेद में बताया है ये इन बड़ी बीमारियों में रामबाण दवा है

 लहसुन सिर्फ मसाले के रूप में खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाती बल्कि अब तों वैज्ञानिक भी मानने लगे है कि लहसुन कई बीमारियों में लाभदायक औषधि की तरह काम करता है।जर्मनी की हेल्थ एडवाइस एसोसिएशन की माने तो यदि लहसुन को बेहद कम मात्रा में खाया जाता है, इसके लाभकारी त्तत्वों का फायदा नहीं मिलता। इसमे पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए,सी व सल्फाइड भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। लहसुन के ऐसे ही कुछ जबरदस्त औषधिय गुणों का वर्णन आयुर्वेद में भी मिलता है हम आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के खजाने से कुछ खास नुस्खे जो बीमारियों में रामबाण की तरह काम करते हैं।

लहसुन में पाए जाने वाले तत्व –

लहसुन में प्रोटीन 6.3 प्रतिशत,

वसा 0.1 प्रतिशत

, कार्बोज 21 प्रतिशत,

खनिज पदार्थ- 1 प्रतिशत,

चूना 0.3 प्रतिशत तथा लोहा 1.3 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होता है।

इसके अतिरिक्त विटामिन ए,

बी, सी एवं सल्फ्यूरिक एसिड विशेष मात्रा में पाई जाती है।

दांतों के दर्द में फायदेमंद आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन लहसुन के सेवन से दांतों के दर्द में आराम मिलता है। लहसुन को लौंग के साथ पीसकर दांतों के दर्द वाले हिस्से पर लगाने से दर्द से तुरंत राहत मिलती है। एंटीबायोटिक की तरह असरदार लहसुन में एंटीबायोटिक दवाओं से अधिक गुण हैं, जिसकी वजह से वह रोगाणुओं का नाश करती है। यही कारण है कि घाव धोने के लिए लहसुन के एक भाग रस में तीन भाग पानी मिलाकर काम में लिया जाता है। चाय में अदरक के साथ लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से अस्थमा की परेशानी को कम किया जा सकता है। कैंसर से रक्षा करता है कैंसर को एक लाइलाज बीमारी माना जाता है। लेकिन शायद आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि आयुर्वेद के अनुसार रोजाना थोड़ी मात्रा में लहसुन का सेवन करने से कैंसर होने की संभावना अस्सी प्रतिशत तक कम हो जाती है।कैंसर के प्रति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है। लहसुन में कैंसर निरोधी तत्व होते हैं। यह शरीर में कैंसर बढऩे से रोकता है। लहसुन के सेवन से ट्यूमर को 50से 70 फीसदी तक कम किया जा सकता है। कफ में लहसुन लाभदायक ठंड या बदलते मौसम में अक्सर किसी भी उम्र के लोगों को कफ और जुकाम जैसी परेशानी हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप लहसुन का नियमित रूप से सेवन करते हैं तो आप ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं से बड़ी ही आसानी से निजात पा सकते हैं। कॉलेस्ट्रोल को कम करता है कॉलेस्ट्रोल की समस्या से परेशान लोगों के लिए लहसुन का नियमित सेवन अमृत साबित हो सकता है। कॉलेस्ट्रोल की समस्या से पीडि़त लोगों के लिए लहसुन किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। रोजाना इसे खाने से आपका कॉलेस्ट्रोल लेवल 12 प्रतिशत तक कम हो सकता है।इसे खाने से दिल की बीमारियों को दूर रखा जा सकता है। विटामिन सी की कमी होने पर जिनके शरीर में रक्त की कमी है, उन्हें लहसुन का सेवन अवश्य करना चाहिए, इसमें पर्याप्त मात्रा में लौह तत्व होता है जो कि रक्त निर्माण में सहायक होता है। लहसुन में विटामिन सी होने से यह स्कर्वी रोग से भी बचाता है। मुहांसों का पक्का इलाज मुंहासों से परेशान लोगों के लिए ये काफी कारगर साबित होता है। इसे खाने से खून साफ होता है।गला खराब होने पर गुनगुने पानी में लहसुन का रस मिलाकर गरारा करने से राहत मिलती है। मौसम में बदलाव आने के साथ इसके सेवन की मात्रा में भी बदलाव करें सर्दी के मौसम में लहसुन का अधिक मात्रा में सेवन किया जा सकता है। लेकिन गर्मी के मौसम में इसका अधिक मात्रा में सेवन ना करें। लहसुन को आप कच्चा भी खा सकते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद गर्भवती महिलाओं को लहसुन का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। गर्भवती महिला को अगर उच्च रक्तचाप की शिकायत हो तो, उसे पूरी गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी रूप में लहसुन का सेवन करना चाहिए। लहसुन सिर्फ मसाले के रूप में खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाती बल्कि अब तों वैज्ञानिक भी मानने लगे है कि लहसुन कई बीमारियों में लाभदायक औषधि की तरह काम करता है।जर्मनी की हेल्थ एडवाइस एसोसिएशन की माने तो यदि लहसुन को बेहद कम मात्रा में खाया जाता है, इसके लाभकारी त्तत्वों का फायदा नहीं मिलता। इसमे विटामिन ए,सी व सल्फाइड भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। लहसुन के ऐसे ही कुछ जबरदस्त औषधिय गुणों का वर्णन आयुर्वेद में भी मिलता है लहसुन

 लहसुन में 6 प्रकार के रसों में से 5 रस पाये जाते हैं, केवल अम्ल नामक रस नहीं पाया जाता है। निम्न रस – मधुर – बीजों में, लवण – नाल के अग्रभाग में, कटु – कन्दों में, तिक्त – पत्तों में, कषाय – नाल में। “”रसोनो बृंहणो वृष्य: स्गिAधोष्ण: पाचर: सर:।”” अर्थात् लहसुन वृहण (सप्तधातुओं को बढ़ाने वाला, वृष्य – वीर्य को बढ़ाने वाला), रस, रक्त, माँस, मेद, अस्थि,  शुक्र स्निग्धाकारक, उष्ण प्रकृत्ति वाला, पाचक (भोजन को पचाने वाला) तथा सारक (मल को मलाशय की ओर धकेलने वाला) होता है। रासायनिक संगठन : इसके केन्द्रों में एक बादामी रंग का उ़डनशील तेल पाया जाता है, जिसमें प्रधान रूप से l होती है तथा ये एक तीव्र प्रतिजैविकका भी काम करते हैं।

श्वसन संस्थान पर लहसनु के उपयोग:

1. लहसुन के रस की 1 से 2 चम्मच मात्रा दिन में 2-3 बार यक्ष्मा दण्डाणुओं (T.B.) से उत्पन्न सभी विकृत्तियों जैसे – फुफ्फुस विकार, स्वर यन्त्रशोथ में लाभदायक होती है। इससे शोध कम होकर लाभ मिलता है।

2. स्वर यन्त्रशोथ में इसका टिंक्चर ½ – 1 ड्राप दिन में 2-3 बार देने पर लाभ होता है।

3. पुराने कफ विकार जैसे – कास, श्वास, स्वरभङग्,एवं श्वासकृच्छता में इसका अवलेह बनाकर उपयोग करने से लाभ होता है।

4. चूंकि लहसुन में जो उ़डनशील तैलीय पदार्थ पाया जाता है, उसका उत्सर्ग त्वचा, फुफ्फुस एवं वृक्क द्वारा होता है, इसी कारण ज्वर में उपयोगी तथा जब इसका उत्सर्ग फुफ्फुसों (श्वास मार्ग) के द्वारा होता है, तो कफ ढ़ीला होता है तथा उसके जीवाणुओं को नाश होकर कफ की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।  तथा खण्डीय में इसके टिंक्चर 2-3 बूंद से आरंभ कर धीरे-धीरे बूंदों की मात्रा बढ़ाकर 20 तक ले जाने से लाभ होता है।

5. खण्डीय फुफ्फुस पाक में इसके टिंक्चर की 30 बूंदें हर 4 घण्टे के उपरान्त जल के साथ देने से 48 घण्टे के अन्दर ही लाभ मालूम होता है तथा 5-6 दिन में ज्वर दूर हो जाता है।

6. बच्चों में कूकर खांसी, इसकी कली के रस की 1 चम्मच में सैंधव नमक डालकर देने से दूर होती है।

7. अधिक दिनों तक लगातार चलने वाली खाँसी में इसकी 3-4 कलियों (छोटे टुक़डों) को अग्नि में भूनकर, नमक लगाकर खाने से में लाभ मिलता है।

8. लहसुन की 5-7 कलियों को तेल में भूनें, जब कलियाँ काली हो जाएं, तब तेल को अग्नि पर से उतार कर जिन बच्चों या वृद्ध लोगों को जिनके  (निमोनिया) या छाती में कफ जमा हो गया है, उनमें छाती पर लेप करके ऊपर से सेंक करने पर कफ ढीला होकर खाँसी के द्वारा बाहर निकल जाता है।

तंत्रिका संस्थान के रोगों में उपयोग:

1रोग में दौरा आने पर जब रोगी बेहोश हो जाए, तब इसके रस की 1-2 बूंद नाक में डालें या सुंघाने से रोगी का संज्ञानाश होकर होश आ जाता है।

2. अपस्मार (मिर्गी) रोग में लहसुन की कलियों के चूर्ण की 1 चम्मच मात्रा को सायँकाल में गर्म पानी में भिगोकर भोजन से पूर्व और पश्चात् उपयोग कराने से लाभ होता है। यही प्रक्रिया दिन में 2 बार करनी चाहिए।

3. लहसुन वात रोग नाशक होता है अत: सभी वात विकारों साईटिका  कटिग्रह एवं मन्याग्रह और सभी लकवे के रोगियों में लहसुन की 7-9 कलियाँ एवं वायविडगं 3 ग्राम मात्रा को 1 गिलास दूध में, 1 गिलास पानी छानकर पिलाने से सत्वर लाभ मिलता है।

4. सभी वात विकार, कमर दर्द, गर्दन दर्द, लकवा इत्यादि अवस्थाओं में सरसों या तिल्ली के 50 ग्राम तेल में लहसुन 5 ग्राम, अजवाइन 5 ग्राम, सोंठ 5 ग्राम और लौंग 5-7 नग डालकर तब तक उबालें जब ये सभी काले हो जाएं। इन्हें छानकर तेल को काँच के मर्तबान में भर लें व दर्द वाले स्थान पर मालिश करने से पी़डा दूर होती है।

5. जीर्णआमवात, सन्धिशोथ में इसे पीसकर लेप करने से शोथ और पी़डा का नाश होता है।

6. बच्चों के वात विकारों में ऊपर निर्दिष्ट तेल की मालिश विशेष लाभदायक होती है।

पाचन संस्थान में उपयोग:

1. अजीर्ण की अवस्था और जिन्हें भूख नहीं लगती है, उन्हें लहसुन कल्प का उपयोग करवाया जाता है। आरंभ में 2-3 कलियाँ खिलाएं, फिर प्रतिदिन 2-2 कलियाँ बढ़ाते हुए शरीर के शक्तिबल के अनुसार 15 कलियों तक ले जाएं। फिर पुन: घटाते हुए 2-3 कलियों तक लाकर बंद कर कर दें। इस कल्प का उपयोग करने से भूख खुलकर लगती है। आंतों में में शिथिलता दूर होकर पाचक रसों का ठीक से स्राव होकर आंतों की पुर: सरण गति बढ़ती है और रोगी का भोजन पचने लगता है।

2. आंतों के कृमि  में इसके रस की 20-30 बूंदें दूध के साथ देने से कृमियों की वृद्धि रूक जाती है तथा मल के साथ निकलने लगते हैं।

3. वातगुल्म, पेट के अफारे, में इसे पीसकर, कर घी के साथ खिलाने से लाभ होता है।

ज्वररोग में उपयोग:

1. विषम ज्वर (मलेरिया) में इसे (3-5 कलियों को) पीस कर या शहद में मिलाकर कुछ मात्रा में तेल या घी साथ सुबह खाली पेट देने से प्लीहा एवं यकृत वृद्धि में लाभ मिलता है।

  2. आंत्रिक ज्वर/मियादी बुखार/मोतीझरा  तथा तन्द्राभज्वर  में इसके टिंक्चर की 8-10 बूंदे शर्बत के साथ 4-6 घण्टे के अन्तराल पर देने से लाभ मिलता है। यदि रोग की प्रारंभिक अवस्था में दे दिया जाये तो ज्वर बढ़ ही नहीं पाता है। 3. इसके टिंक्चर की 5-7 बूंदें शर्बत के साथ  औषध का काम करती है।

ह्वदय रोग में:

1. ह्वदय रोग की अचूक दवा है।

2. लहसुन में लिपिड (Lipid) को कम करने की क्षमता या  प्रभाव होने के कारण कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइडस की मात्रा को कम करता है।

3. लहसुन की 3-4 कलियों का प्रतिदिन सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ लेवल कम होकर ह्वदयघात की संभावनाओं को कम करता है।

1. लहसुन की तीक्ष्णता को कम करने के लिए इनकी कलियों को शाम को छाछ या दही के पानी में भिगो लें तथा सुबह सेवन करने से इसकी उग्र गन्ध एवं तीक्ष्णता दोनों नष्ट हो जाती हैं।

2. लहसुन की 5 ग्राम मात्रा तथा अर्जुन छाल 3 ग्राम मात्रा को दूध में उबाल कर (क्षीरपाक बनाकर) लेने से मायोकार्डियल इन्फेक्शन तथा उच्चा कॉलेस्ट्रॉलदोनों से बचा जा सकता है।

3. ह्वदय रोग के कारण उदर में गैस भरना, शरीर में सूजन आने पर, लहसुन की कलियों का नियमित सेवन करने से मूत्र की प्रवृत्ति बढ़कर सूजन दूर होता है तथा वायु निकल कर ह्वदय पर दबाव भी कम होता है।

4.नामक गले के उग्र विकार में इसकी 1-1 कली को चूसने पर विकृत कला दूर होकर रोग में आराम मिलता है, बच्चों को इसके रस (आधा चम्मच) में शहद या शर्बत के साथ देना चाहिए।

5. पशुओं में होने वाले रोग में इसे 10-15 ग्राम मात्रा में आभ्यान्तर प्रयोग तथा गले में लेप के रूप में प्रयोग करते हैं : लहसुन के कारण होने वाले उपद्रवों में हानिनिवारक औषध के रूप में मातीरा, धनियाँ एवं बादाम के तेल में उपयोग में लाते हैं। : गर्भवती स्त्रयों तथा पित्त प्रकृत्ति वाले पुरूषों को लहसुन का अति सेवन निषेध माना गया है

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